यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने एक ऐसा फैसला ले लिया है जिसने उनके अपने ही देश के लोगों को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया है. रूसी हमलों के बीच यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई बड़े शहरों की सड़कों पर जो नजारा दिख रहा है, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. लोग रूसी मिसाइलों के डर के बावजूद सड़कों पर उतरे हैं, और उनके हाथ में कोई आम बैनर नहीं बल्कि अपने लोकप्रिय रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव को वापस लाने की मांग वाले पोस्टर हैं.
युद्ध के नाजुक मोड़ पर अपने सबसे कामयाब और आधुनिक सोच वाले रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव को हटाने का फैसला जेलेंस्की के लिए एक बड़ा सियासी संकट बन गया है. केवल 35 साल के फेडोरोव को यूक्रेन में ड्रोन तकनीक और आधुनिक युद्ध रणनीति का जनक माना जाता है. ऐसे में उन्हें सिर्फ छह महीने के कार्यकाल के बाद पद से हटा देना जनता और सेना के एक बड़े हिस्से के गले नहीं उतर रहा है. For another perspective, see: this related article.
इस फैसले के पीछे की असली कहानी क्या है? क्यों जेलेंस्की ने अपने सबसे भरोसेमंद और कामयाब रणनीतिकार को बाहर का रास्ता दिखा दिया? चलिए इस पूरे विवाद की परतों को करीब से समझते हैं.
मिखाइलो फेडोरोव को हटाने के पीछे की असली वजह क्या है
मिखाइलो फेडोरोव को हटाने के पीछे कोई भ्रष्टाचार का सीधा आरोप नहीं है, बल्कि सेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनका पुराना और गंभीर टकराव है. जेलेंस्की ने खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि रक्षा मंत्रालय और सैन्य कमान के बीच तालमेल पूरी तरह टूट चुका था. Similar reporting on this matter has been provided by NBC News.
फेडोरोव का सीधा टकराव यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ जनरल ओलेक्सांद्र सिरस्की से था. यह टकराव व्यक्तिगत नहीं बल्कि दो अलग-अलग विचारधाराओं की जंग थी.
एक तरफ 35 साल के फेडोरोव थे जो तकनीक, ड्रोन, फाइबर-ऑप्टिक कम्युनिकेशन और आधुनिक तरीकों से जंग लड़ना चाहते थे. दूसरी तरफ जनरल सिरस्की हैं, जिन्हें पुरानी सोवियत शैली की पारंपरिक सैन्य रणनीति का समर्थक माना जाता है. फेडोरोव ने सिरस्की पर आरोप लगाया कि वे सेना में सुधारों को रोक रहे थे क्योंकि जंग का तरीका अब पूरी तरह बदल चुका है.
विवाद इतना बढ़ गया कि फेडोरोव ने खुद जेलेंस्की से सिरस्की को हटाने की मांग की थी. जब जेलेंस्की ने ऐसा करने से मना किया, तो सिरस्की ने जेलेंस्की के सामने अल्टीमेटम रख दिया कि या तो रक्षा मंत्री रहेंगे या वे खुद. जेलेंस्की ने अंततः अपने जनरल का साथ दिया और देश के सबसे लोकप्रिय रक्षा सुधारक को बर्खास्त कर दिया.
क्यों मिखाइलो फेडोरोव यूक्रेन के लोगों के लिए इतने खास थे
फेडोरोव केवल एक राजनेता नहीं थे. वे यूक्रेन के डिजिटल बदलाव के नायक थे. रक्षा मंत्री बनने से पहले वे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री थे. जब उन्हें जनवरी में रक्षा मंत्रालय सौंपा गया, तो उन्होंने छह महीने के भीतर ही यूक्रेनी सेना की रीढ़ कहे जाने वाले ड्रोन प्रोग्राम को पूरी तरह से बदल दिया.
उनके कुछ ऐसे फैसले जो यूक्रेन के लिए जीवनदान साबित हुए:
- स्टारलिंक पर रूस की पहुंच रोकना: फेडोरोव ने व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करके रूसी सेना को स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल करने से रोका. इससे यूक्रेन को युद्ध के मैदान में तकनीकी बढ़त मिली.
- फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन तकनीक: उन्होंने पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय यूक्रेन के अपने बजट को आधुनिक ड्रोन और रीकॉन सिस्टम की तरफ मोड़ा.
- पारदर्शी खरीद प्रणाली: रक्षा विभाग में होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को प्रतिस्पर्धी और डिजिटल बनाने की कोशिश की.
यही वजह है कि जब उन्हें हटाया गया, तो कीव की सड़कों पर "फेडोरोव को वापस लाओ" के नारे गूंज उठे. लोगों को डर है कि उनके जाने से यूक्रेन का तकनीकी रूप से लड़ा जा रहा युद्ध कमजोर पड़ जाएगा.
जेलेंस्की की पुरानी आदत और सेना के साथ बार-बार टकराव
यह पहली बार नहीं है जब जेलेंस्की ने अपनी सेना के लोकप्रिय चेहरों को किनारे किया है. इससे पहले उन्होंने देश के बेहद लोकप्रिय जनरल वालेरी जालुझनी को भी उनके पद से हटाकर लंदन में राजदूत बनाकर भेज दिया था. जालुझनी और जेलेंस्की के बीच भी युद्ध की रणनीति को लेकर गहरे मतभेद थे.
जेलेंस्की के इस रवैये से यूक्रेनी सिविल सोसायटी में यह संदेश जा रहा है कि जो भी अधिकारी बहुत अधिक लोकप्रिय हो जाता है या स्वतंत्र रूप से काम करने की कोशिश करता है, उसे हटा दिया जाता है. आलोचक आरोप लगा रहे हैं कि सेना के फैसले अब युद्ध के मैदान की जरूरतों के बजाय वफादारी के आधार पर लिए जा रहे हैं.
नए कार्यकारी रक्षा मंत्री येवेन ख्मारा के सामने क्या चुनौतियां हैं
फेडोरोव के जाने के बाद जेलेंस्की ने मेजर जनरल येवेन ख्मारा को कार्यकारी रक्षा मंत्री नियुक्त किया है. ख्मारा इससे पहले यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के कार्यकारी प्रमुख थे और उनके पास विशेष बलों का नेतृत्व करने का लंबा अनुभव है.
लेकिन ख्मारा के लिए यह रास्ता आसान नहीं होगा:
- जनता का भरोसा जीतना: सबसे बड़ी चुनौती उस जनता और सैनिकों का भरोसा जीतना है जो फेडोरोव के जाने से बेहद निराश और गुस्से में हैं.
- ड्रोन प्रोग्राम की रफ्तार बनाए रखना: फेडोरोव ने जिस तकनीकी क्रांति की शुरुआत की थी, उसे बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाना ख्मारा के लिए बड़ी परीक्षा होगी.
- सैन्य लीडरशिप के साथ तालमेल: क्या ख्मारा जनरल सिरस्की के प्रभाव में काम करेंगे या वे अपनी स्वतंत्र रणनीति बना पाएंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.
इस राजनीतिक संकट के बीच यूक्रेन के लिए आगे का रास्ता
जेलेंस्की का यह कदम देश के भीतर एक नए राजनीतिक विभाजन को जन्म दे रहा है. जब रूस फ्रंटलाइन पर लगातार दबाव बना रहा है, तब यूक्रेन के भीतर का यह बिखराव खतरनाक साबित हो सकता है.
यूक्रेन को इस संकट से उबरने के लिए तुरंत कुछ कड़े कदम उठाने होंगे:
- तकनीकी सुधारों को जारी रखना: सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि फेडोरोव के जाने के बाद भी ड्रोन और आधुनिक तकनीकों के लिए मिलने वाला बजट प्रभावित नहीं होगा.
- सेना के भीतर पारदर्शिता: रक्षा सौदों और नियुक्तियों में पारदर्शिता लानी होगी ताकि जनता को यह न लगे कि वफादारी को योग्यता से ऊपर रखा जा रहा है.
- जनता से सीधा संवाद: राष्ट्रपति जेलेंस्की को केवल राजनीतिक बयानों के बजाय जनता को भरोसे में लेना होगा कि यह फैसला देश की सुरक्षा के हित में कैसे है.
यूक्रेन इस समय दो मोर्चों पर लड़ रहा है—एक सीमा पर रूसी सेना के खिलाफ, और दूसरा देश के भीतर अपनी राजनीतिक स्थिरता को बचाने के लिए. जेलेंस्की ने फेडोरोव को हटाकर जो जुआ खेला है, उसका नतीजा आने वाले हफ्तों में फ्रंटलाइन पर दिखने वाले परिणामों से ही तय होगा.