अमेरिका-ईरान वार्ता के पीछे कतर और पाकिस्तान की असली भूमिका समझें

अमेरिका-ईरान वार्ता के पीछे कतर और पाकिस्तान की असली भूमिका समझें

जब जून के महीने में पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठा था और अमेरिका-ईरान के बीच मिसाइलें चल रही थीं, तब किसी ने नहीं सोचा था कि दोनों देश अचानक बातचीत की मेज पर आ जाएंगे। लोग इसे डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति कह रहे हैं। कुछ लोग इसे ईरान की मजबूरी मान रहे हैं। सच तो यह है कि इस पूरी कहानी के असली हीरो पर्दे के पीछे थे। अमेरिका और ईरान को एक मंच पर लाने का श्रेय सीधे तौर पर कतर और पाकिस्तान को जाता है।

अक्सर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लोग केवल बड़े देशों का खेल समझ लेते हैं। यह एक बहुत बड़ी भूल है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधे संवाद का कोई रास्ता नहीं बचा था। दोनों एक-दूसरे पर हमले कर रहे थे। 11 जून की वो रात याद कीजिए जब ईरान के रनवे पर बमबारी के बीच कतर के मध्यस्थ एक विमान में फंसे हुए थे। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर भी बातचीत का सिरा टूटने नहीं दिया। इसी लगन का नतीजा था कि स्विट्जरलैंड के लेक ल्यूसर्न में 18 घंटे लंबी मैराथन बैठक संभव हो सकी।

कतर और पाकिस्तान की जुगलबंदी ने कैसे बदला माहौल

मध्यस्थता करना कोई आसान काम नहीं होता। खासकर तब जब सामने दो ऐसे दुश्मन हों जो एक-दूसरे को मिटाने पर तुले हों। कतर के पास धन और कूटनीतिक पहुंच है। पाकिस्तान के पास ईरान के साथ एक लंबी सीमा और ऐतिहासिक संबंध हैं। दोनों ने अपनी ताकत को सही जगह लगाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने इस बातचीत को सफल बनाने के लिए खुद मोर्चा संभाला।

स्विट्जरलैंड में हुई उच्च स्तरीय बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ मौजूद थे। यह कोई सामान्य मुलाकात नहीं थी। दोनों देशों ने एक 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर डिजिटल हस्ताक्षर किए। इस समझौते ने अगले 60 दिनों के लिए शांति वार्ता का एक स्पष्ट रास्ता तैयार कर दिया है। ट्रंप ने खुद सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि पाकिस्तान और कतर ने इस समझौते को कराने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

क्या डोनाल्ड ट्रंप सच में बदल गए हैं

डोनाल्ड ट्रंप अपने आक्रामक रवैये के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अतीत में ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए। इस बार उनका रुख थोड़ा अलग दिखा। वे शांति समझौते का श्रेय कतर और पाकिस्तान को दे रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान के लोग ईरान को अच्छी तरह जानते हैं और कतर के संबंध भी मजबूत हैं। ट्रंप की इस तारीफ के पीछे एक गहरी कूटनीति छिपी है।

अमेरिका के भीतर इस फैसले को लेकर घमासान मचा है। डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने का कोई ठोस वादा नहीं किया, फिर भी ट्रंप ने उसे प्रतिबंधों में ढील दे दी। अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के नेताओं का मानना है कि यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। ट्रंप ने भी इसका जवाब कड़े लहजे में दिया। उन्होंने तेहरान को चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने वादों को पूरा नहीं किया, तो अमेरिका सख्त सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

पर्दे के पीछे की वो बातें जो कोई नहीं बताता

इस वार्ता के दौरान कई तकनीकी पेच फंसे हुए हैं। ईरान का दावा है कि कतर में मौजूद उसकी 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों में से 6 अरब डॉलर जल्द ही रिलीज कर दिए जाएंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे ईरानी जनता की बड़ी जीत बताया है। अमेरिकी अधिकारी अभी इस बात को खुले तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इस विरोधाभास से साफ पता चलता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है।

कतर के गैस टर्मिनल पर हुआ हालिया रहस्यमयी धमाका भी इसी कूटनीतिक खींचतान का हिस्सा माना जा रहा है। इसमें कई लोग घायल हुए और कुछ लापता हैं। यह दिखाता है कि इस शांति समझौते को पटरी से उतारने की कोशिशें हर स्तर पर चल रही हैं। इस माहौल में भी कतर और पाकिस्तान के वार्ताकार दोनों पक्षों को बांधे रखने का काम कर रहे हैं।

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आगे का रास्ता और आपकी भूमिका

आने वाले दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद नाजुक हैं। दोहा में तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू हो चुकी है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी सीधे बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि कतर के अधिकारी उनके बीच संदेशवाहक बने हुए हैं। यह प्रक्रिया अगले दो महीनों तक लगातार चलेगी।

यदि आप अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपको इस घटनाक्रम पर बारीक नजर रखनी चाहिए। तेल की कीमतें और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सीधे तौर पर इस वार्ता की सफलता पर निर्भर करती है। अगले कदम के तौर पर आपको ईरान पर लगे प्रतिबंधों के वैश्विक बाजार पर असर से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन करना चाहिए ताकि आप आने वाले आर्थिक बदलावों के लिए तैयार रह सकें।

RM

Ryan Murphy

Ryan Murphy combines academic expertise with journalistic flair, crafting stories that resonate with both experts and general readers alike.